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Follicle Stimulating Hormone(FSH) का उपयोग

Follicle Stimulating Hormone(FSH) का इस्तेमाल महिला बांझपन (गर्भवती बनने की असमर्थता) और नर अल्पजननग्रंथिता (पुरुष हार्मोन में कमी) में किया जाता है

Follicle Stimulating Hormone(FSH) कैसे काम करता है

एफएसएच, कूप उत्तेजक हारमोन रिसेप्टर के साथ आबद्ध हो जाता है जो कि एक जी-युग्मित ट्रांसमेम्ब्रेन रिसेप्टर है। इसके रिसेप्टर के साथ एफएसएच के आबद्ध होने से यह PI3K (फॉस्फेटीडाईलिनोसिटोल-3-काइनेज) और Akt संकेतन मार्ग के फोस्फोराइलेशन और एक्टिवेशन को प्रेरित करता हुआ जान पड़ता है जो कोशिकाओं में कई अन्य चयापचयी और संबंधित अस्तित्व या परिपक्वता कार्यों को विनियमित करने के लिए जाना जाता है।

Follicle Stimulating Hormone(FSH) के सामान्य दुष्प्रभाव

लाल चकत्ते, सिर दर्द, इंजेक्शन स्थल में एलर्जिक प्रतिक्रिया, पेट में दर्द, मुँहासे, पुरुष में स्तन की सूजन, जठरांत्र सम्बन्धी असुविधा, डिम्बग्रंथि में फोड़ा
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Follicle Stimulating Hormone(FSH) के लिए उपलब्ध दवा

Follicle Stimulating Hormone(FSH) के लिए विशेषज्ञ की सलाह

  • यदि महिला हैं और बहुगांठीय अंडाशय की बीमारी है (अंडाशय और अधिवृक्क ग्रंथि द्वारा में पुरुष हार्मोन के अधिक उत्पादन के कारण अंडाशय में पुटि विकसित होना) या योनि से अस्प्ष्ट रक्तस्राव हो तो कोष उत्तेजित करने वाले हार्मोन का सेवन न करें।
  • यदि दमा, पोरफायरिया (त्वचा व अन्य अंगों को प्रभावित करने वाली दुर्लभ रक्त वर्णक बीमारी); स्तन, अंडाशय, गर्भाशय, अंडकोष, हायपोथैलेमस या पीयूष ग्रंथि का कैंसर हो तो कोष उत्तेजित करने वाले हार्मोन के सेवन से बचें।
  • कोष उत्तेजित करने वाले हार्मोन के सेवन का संबंध एक से अधिक जन्म (जुड़वे/त्रिक) से किया जाता रहा है। यदि एकाधिक प्रसव से होने वाले चिकित्सकीय जटिलताओं का जोखिम हो तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।आपका डॉक्टर आपको सही समय पर सही खुराक की सलाह देगा।
  • यदि आपको पेट के निचले हिस्से में दर्द के साथ उल्टी का एहसास (मिचली) या और अधिक जटिलता जैसे कम मूत्र उत्पन्न होना, वजन बढ़ना, सांस लेने में दिक्कत या पेट या सीने में संभावित तरल पदार्थ का जमाव हो तो अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। ये संकेत हैं कि आपमें उर्वरता दवाओं के इस्तेमाल से अंडाशय की समस्या (ओवेरियन हाइपरसिम्युलेशन सिंड्रोम/ओएचएसएस) उत्पन्न हो रही है।
  • यदि आप ऐसे पुरुष हैं जिसमें रक्त में कोष उत्तेजित करने वाले हार्मोन का स्तर अधिक हो तो यह अंडकोष के क्षतिग्रस्त होने का संकेत हैं (यानि वीर्यकोष वीर्य उत्पन्न करने में असमर्थ है)। यह दवा ऐसि मामलों में कारगर साबित नहीं होता।
  • कोष उत्तेजित करने वाले हार्मोन उन महिलाओं में प्रभावी नहीं है जिनका अंडाशय अंडे उत्पन्न करने में असमर्थ है (प्राथमिक डिंम्बग्रंथि विफलता), महिलाएं जिनमें जल्दे रजोनिवृत्ति (महिलाओं के जीवन का ऐसा समय जब महावारी बंद हो जाती है) हो जाए या विकृत प्रजनन अंग हो।
  • यदि आप गर्भवती हैं, आपको लगे कि आप गर्भवती हैं, होने वाली हैं या स्तनपान करा रही हैं तो कोष उत्तेजित करने वाले हार्मोन का प्रयोग न करें।